सेंट्रल इंडिया की IVUS कार्यशाला में गेस्ट फैकल्टी बने MMI नारायणा हॉस्पिटल, रायपुर के डॉ. स्नेहिल गोस्वामी

सेंट्रल इंडिया की IVUS कार्यशाला में गेस्ट फैकल्टी बने MMI नारायणा हॉस्पिटल, रायपुर के डॉ. स्नेहिल गोस्वामी
भोपाल में आयोजित सेंट्रल इंडिया की पहली IVUS कार्यशाला में आधुनिक तकनीक से एंजियोप्लास्टी के बेहतर परिणामों पर हुआ विस्तृत मंथन
भोपाल।
CDEE & CC CON भोपाल 2025 के अंतर्गत आयोजित प्रतिष्ठित शैक्षणिक कार्यक्रम IVUS CONNECT – Learn From the Masters का भव्य आयोजन रविवार, 18 जनवरी 2026 को होटल मैरियट, भोपाल में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम सेंट्रल इंडिया में इंट्रावास्कुलर अल्ट्रासाउंड (IVUS) जैसी अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित अपनी तरह की पहली महत्वपूर्ण कार्यशाला रहा।
इस IVUS कार्यशाला में देश के विभिन्न हिस्सों से आए लगभग 55 अनुभवी कार्डियोलॉजिस्टों ने सक्रिय भागीदारी की। कार्यक्रम के दौरान लगभग 11 जटिल क्लिनिकल मामलों की प्रस्तुति दी गई, जिनमें एंजियोप्लास्टी के दौरान IVUS तकनीक के प्रभावी उपयोग, सटीक स्टेंट प्लेसमेंट तथा मरीजों के दीर्घकालिक बेहतर परिणामों पर गहन चर्चा की गई।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य कार्डियोलॉजिस्टों को एंजियोप्लास्टी के दौरान नई और उन्नत IVUS तकनीक की उपयोगिता से अवगत कराना तथा उन्हें इसके व्यावहारिक उपयोग का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण प्रदान करना था, ताकि हार्ट पेशेंट्स के उपचार को और अधिक सुरक्षित, सटीक एवं प्रभावी बनाया जा सके।
इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक कार्यक्रम में MMI नारायणा हॉस्पिटल, रायपुर के वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. स्नेहिल गोस्वामी को विशेष रूप से गेस्ट फैकल्टी एवं IVUS एक्सपर्ट के रूप में आमंत्रित किया गया। डॉ. गोस्वामी ने IVUS तकनीक के क्लिनिकल अनुप्रयोग, इसकी वैज्ञानिक महत्ता तथा जटिल कोरोनरी मामलों में इसके उपयोग से मरीजों के बेहतर क्लिनिकल आउटकम पर विस्तार से प्रकाश डाला।
डॉ. स्नेहिल गोस्वामी ने अपने सत्र के दौरान बताया कि किस प्रकार IVUS तकनीक एंजियोप्लास्टी को अधिक प्रिसाइस, सेफ और रिज़ल्ट-ओरिएंटेड बनाती है। उनके अनुभव और मार्गदर्शन से प्रतिभागी कार्डियोलॉजिस्टों को आधुनिक तकनीक को अपनी दैनिक चिकित्सा प्रक्रिया में शामिल करने की महत्वपूर्ण व्यावहारिक समझ प्राप्त हुई।
कार्यशाला के दौरान हैंड्स-ऑन IVUS ट्रेनिंग, केस बेस डिस्कशन, इंटरएक्टिव सेशन्स एवं IVUS क्विज़ जैसे शैक्षणिक सत्रों का आयोजन किया गया, जिससे प्रतिभागियों को तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ व्यवहारिक अनुभव भी मिला।
कार्यक्रम में उपस्थित विशेषज्ञों ने एकमत से माना कि इस प्रकार की उन्नत तकनीक आधारित कार्यशालाएं न केवल चिकित्सा शिक्षा को नई दिशा देती हैं, बल्कि सेंट्रल इंडिया में कार्डियोलॉजी के क्षेत्र को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
यह IVUS कार्यशाला चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि रही और भविष्य में इस तरह के और भी उन्नत शैक्षणिक कार्यक्रमों के लिए एक मजबूत आधार साबित हुई।



