
श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ में आज जड़ भरत और हिरण कश्यप वध, भक्त प्रह्वाद, भगवान नरसिंह अवतार की कथा सारांश में बताई, भागवताचार्य आदरणीय श्री ओम प्रकाश जोशी* ने अपने मुखाग्र बृंद से कहते हुए , जड़ भरत की कथा श्रीमद्भागवत पुराण और विष्णु पुराण में वर्णित एक महापुरुष की कहानी है, जो पूर्वजन्म में एक राजा थे. मृत्यु के समय हिरण के बच्चे के प्रति अत्यधिक आसक्ति के कारण, वे अगली योनि में मृग बने. इस योनि के बाद, वे एक ऐसे ब्राह्मण के रूप में जन्मे जो मौन और जड़वत् जीवन जीते थे. बाद में, सिन्धुसौवीर देश के राजा रहूगण द्वारा पालकी ढोते समय, जड़ भरत ने उन्हें आत्मा और संसार की आसक्ति से मुक्ति का ज्ञान दिया, जिससे राजा ने आत्म-ज्ञान प्राप्त किया
भागवताचार्य ने आगे कहा कि नरसिंह अवतार भगवान विष्णु का चौथा दशावतार है, जिसमें उन्होंने आधे मानव और आधे सिंह का रूप धारण किया था. यह अवतार भक्त प्रह्लाद की रक्षा और उनके पिता दैत्य राजा हिरण्यकश्यप के वध के लिए लिया गया था, जिसने वरदान प्राप्त करके अहंकार और अत्याचार को बढ़ाया था. नरसिंह अवतार धर्म और न्याय के प्रतीक हैं, जो बुराई को नष्ट करने और भक्तों की रक्षा करने के लिए प्रकट हुए थे
जिससे भागवत कथा की संपूर्ण फल की प्राप्ति होती है, इस अवसर पर मुरारका परिवार सभी सदस्य कथा का आनंद लेते हुए, इस अवसर पर रायपुर से पधारे ईश्वर अग्रवाल जी, पवन CA, कर्तव्य अग्रवाल, जी ,बालाघाट लांजी से पधारे शाह जी राजेश अग्रवाल जी , पवन रामकुमार जी,केडियाजी तुसरा वाले,
रायपुर से पधारे बृजमोहन अग्रवाल जी सांसद का पूरा परिवार श्रीमती सरिता अग्रवाल, राजेंद्र मधु अग्रवाल , श्रीमति गोलू भैया, सावित्री दीदी,अर्जुन सिंदार,महावीर अग्रवाल जी रोज़बे वाले, श्याम गोयल जी, रमेश लखी राम जी , ध्रुव अग्रवाल जी स्वर्ण भूमि वाले, आनंद अग्रवाल जी, विषेश रूप से उपस्थित रहे,
कथा के भाव को मनोहारी, भक्तिमय बनाया, कथा में थानखमरिया से श्रवण जी सुरेशजी, चंदन अग्र, बलदेव महाराज जी, अनिल सिंघानिया, डॉ शर्मा जी,रायपुर, रिश्तेदार शामिल हुए
आत्मज्ञानः
जड़ भरत, जो वास्तव में एक ज्ञानी थे, राजा राहुगण को आत्मज्ञान का उपदेश देते हैं और उन्हें संसार की नश्वरता और भगवान की भक्ति का महत्व समझाते हैं।
आयोजक:-
मुरारका परिवार



